Thursday, 19 February 2009

अष्टकूट मिलान

आज काफी व्यस्तता के बाद पुनः ब्लाग पर एक आम समस्या से चिंतित हॅ। एक ओर जहाँ ज्योतिष का प्रचार बढ रहा है वहीं दूसरी ओर ज्योतिष की निंदा करनेवालों की संख्या बढ रही है। कारण अधूरा ज्ञान रखनेवाले ज्योतिषी क्योंकि यह क्षेत्र ऐसा है जहाँ अल्प ज्ञान रखने वाला भी अपने को प्रकांड विव्दान समझता है।
भारत में परिवार सुरक्षित है इसका एक बहुत बडा कारण प्राचीन भारतीय मेलापक पद्वति है । पश्चिमी देशो में परिवार का पतन हो गया है । समाज असुरक्षित हो गया है । परिवार और समाज में असुरक्षा की भावना हो गई है। भारतीय परिवार आज भी सुरक्षित है और व्यक्ति समाज से डरता है। ज्योतिष छह वेदांगों में से एक है। वेदों की स्थापना काल से ही यह तय था कि पारिवारिक इकाई जितनी सुदृढ होगी उतना ही समाज शक्तिशली होगा तथा राष्ट्र् मजबूत होगा। परिवार पति पत्नी की बीच मैतक्य की आवष्यकता के लिये प्राचीन ऋषियों ने जन्म नक्षत्र पर आधारित तुलनात्मक विवरण है जिसके पूर्णांक 36 है। ऋषियों ने अनुभव किया कि पुरूष व स्त्री के कुछ नक्षत्र तो एक दूसरे से सहयोग करते है और कुछ बिल्कुल सहयोग नहीं करते है। यहाँ बात आती है अष्ट कूट मिलान की । दक्षिण में 10 गुण माने गये हैं। इनके नाम दिन (भाग्य) गण (संपति ) महेन्द्रम (परस पर प्रेमद्ध ) स्त्रीदीघ्र्र्रम (समान्य शुभत्व) योनि (प्रणय सुखद्ध) राशि पारिवारिक उन्नति, क्षिययाधिपति (धन-धान्यद्ध , वैष्य (संतानद्ध, रज्जु ;व्यावाहरिक दीघ्र्रताद्ध वेध ;पुत्र प्राप्तिद्ध इसके अलावा पुरूष व स्त्री के गोत्र व वर्ण भी दक्षिण में देखा जाता है। उत्तर भारत में अष्ट कूट मिलान में वर्ण से कार्यक्षमता , तारा से भाग्य , वैष्य से प्रधानता , योनि से मानसिकता, ग्रह मैत्री से सामंजस्य, गण प्रधानता ,भकूट से प्रेम, नाडी से स्वास्थ्य देखा जाता है। जहाँ हम विवाह के लिए लडके व लडकी के ढूढने में इतना समय लगाते है। वहीं कुडंली हम एक अयोग्य पंडित से मिलवाकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते है। हम यह भी पता नहीं करते है कि कुडंली में क्या अनुभव या दक्षता है । यही कारण है कि हमारे कई परिवार सुख व समृध्द नहीं हो पाते है।
मेरा व्यक्तिगत अनुभव व उसके शोध कर पाया कि अष्टकूट मिलान कि अधिकता के उपरांत ही वैवाहिक जीवन से अस्थिरता के और भी कारण है। जिसमें सप्तम भाव व भावेश लग्न व लग्नेश की उपेक्षा भी शमिल है क्योकि नक्षत्र मिलान स्वभाव रूचि एवम् संतान पक्ष का महत्व दिया जाता है।
अभी एक वर्ष पूर्व ही एक सज्जन एक पत्रिका लेकर आए कि हमारे गाॅव के पंडित ने 26 गुण मिलान शुभ कहा है। अतः आप इसमें विवाह की शुभ तारिख निर्धारित कर दे तो मैंने उनसे कहा कि मिलान शुभ नहीं है तो उन्होंने कहा साहब 26) गुण है मैने भी तिथि वार कलैंडर पर देखा है । 26 गुण है। मैने कहा सप्तम भाव में राहू व मंगल है । लग्न व लग्नेश व चन्द्र भी पीडित है। व कन्या की मारकेश की दषा चल रही है। विवाह शुभ नहीं है। नहीं माने विवाह हो गया कन्या धनाढ्य घराने की थी खूब दहेज भी लाई थी। विवाह के छः माह बाद ही पति पत्नी में विवाद होने लगे पति के नौकरी पर जाने के उपरांत पत्नी ने कुछ खाकर आत्महत्या कर ली। कारण चन्द्र केतु से युक्त था चन्द्र भी पक्षबली नहीं था गुरू का रक्षात्मक आवरण भी नहीं था।
अतः अंत में यही है कि प़त्रिका मिलाने के लिये विंप्रगण कुछ श्रम करें तो विवाहिक जीवन की काफी कुछ अशुभ घटनाओं को टाल सकते हैं।


Friday, 2 January 2009

शुभ कामनाये

श्रध्दां मेधां यश: प्रज्ञां, विद्यां पुष्टिं श्रयिं बलम्।
तेज आयुष्यमारोग्यं, देहि त्वंम् नववर्षम ।।

Friday, 5 December 2008

शनि न्यायकरी भी


सिधार्थ जोशी जी ने कहा की कुछ ऐसा लिखो की जो आम जनता को समझ में आए , सोचा शनि के बारे में लिखा जाए क्योंकि आम जनता उसी से भयभीत रहती है
सूर्य पुत्र शनि भारतीय ज्योतिष में मान्य नवगृह मंडल में उनका प्रमुख स्थान है यह सूर्य से छठा गृह है और आकार में दूसरा गृह है यह सूर्य से १४२.७ किलोमीटर तथा पृथ्वी से १२४.२४ किलोमीटर दूर है शनि सूर्य की २९.४६ वर्ष में परिकृमा करता है इसकी परिक्रमण अवधि १० घंटा ४० मी . तथा २१ उपगृह है
शनि की दैनिक गति ३ से ६ विकला , इसकी मध्यम गति ८ कला से १ विकला होती है एक राशि में ३० माह तक रहता है तथा १४० दिन वक्री रहता है वक्री से मार्गी होते समय ५ दिन स्तंभित रहता है कुम्भ राशि के २० डिग्री तक मूल त्रिकोन तक शेष अंश में स्वगृही होता है तुला के २० अंश में परमोच्य तथा मेष में २० अंश में परम नीच का होता है शनि के नैसर्गिक बुध ,शुक्र ,राहूमित्र तथा सूर्य,चंद्र ,मंगल शत्रु तथा गुरु सम होते है अंकशास्त्र के अनुसार ८ अंक का स्वामी तथा नीलम,फिरोजा , जामुनिया शनि के रत्ना है व्यवसाय में भूमि के गर्भ के पदार्थो पर अधिकार है जैसे प्रवज्या खनन तेल ,पत्थर न्यायालय भू गर्भ्शास्त्री ,जेल, विदेशनीति , स्नायुतंत्र ,लकवा ,मानसिक परेशानी, नपुंसकता , गठिया ,आदि शनि के कारक में शामिल है
पाशचात्य ज्योतिष में दुर्भाग्य को लाने वाला कहा गया है विलियम लिली के अनुसार शीतल रुक्ष ,नीचे की और दृष्टि,केश काले , कान लटकता है अलेंलियो के अनुसार उन्हें शांत , गंभीर और विचारी प्रवृति देता है वृधावस्था पर इसका अधिकार होता है जगत में सच्चे और झूठे का भेद समझाना इनका श्रेष्ठ गुण होता है
स्वतंत्र भारत की पत्रिका ( १५ अगस्त १९४७ , ००:०१ ,दिल्ली ) में भी शनि कारक है भाग्य (नवं ) एवं दशम भाव का भावेश है तथा लग्नेश की महादशा है दशम व् नवम भाव का भावेश है तथा वर्तमान में सिंह राशि का गोचर है पूर्व में नवम्बर ०६ से जनवरी ०७ तक वक्री सिंघस्था गोचर व् गुरु का अनुराधा नक्षत्र का गोचर था शनि और गुरु को न्याय से जोड़ा गया है , सिंह राशि जो की राज्यकीय (सरकार ) का घोतक है के ऊपर से शनि का गोचर न्यायपालिका के कठोर निर्णय का सूचक है
भारतीय इतिहास में किसी भी केंद्रीय मंत्री को न्यायालय द्वारा उम्रकैद (शिब्बू सरीन ) नवजोत सिंग सिद्धू , राज्य सरकारों को कड़ी फटकारें सर्वौच्च न्यालय के ऐसे उधाहरण है जो शनि की सूर्य की राशि से गोचर का सूचक है तथा अभी भी न्यालय द्वारा ऐसे कठोर निर्णय जो इतिहासिक होगे
काल पुरूष की दशम एवं एकादश भाव की राशि शनि की है जैसा की दशम कर्म एवं एकादश (आय) कर्म के अनुसार फल का भाव है येही शनि दर्शाते है की जिस अनुसार कर्म करोगे उसी कर्मानुसार फल मिलेगा
अत: आम जनता भयभीत न हो कर अच्छे कर्म करे शनि यह ही संदेश देना चाहते हैं

Thursday, 13 November 2008

मंथन



आज कल जिस तरह ज्योतिष का प्रचार प्रसार बढ़ रहा है उसी प्रकार उसका विरोध बढ़ रहा है यह एक चिंतनीय विषय है, मंथन की आवश्यकता है शायद हम भी दोषी है , आज कल जो चमकता ही वही बिकता है , जो ज्योतिषी बड़ी बड़ी माला पहन कर बड़ी बड़ी गाडियों में बैठ कर ,ऊँचा शुल्क ले कर ज्योतिष की समस्यों का समाधान करते है ,वह स्वयं की समस्यों से ग्रसित रहते है , अच्छा का कोई तो पैमाना होगा यह जातक को स्वम निर्णय करना होगा ,क्या विभिन्न चैनल पर आने वाले ज्योतिषी सही फलादेश करते है , यह निर्णय आप स्वम करे ,मरे विचार से ये सभी भ्रमित कर रहे है सभी का जनम अलग अलग समय ,दिन ,नक्षत्र में हुआ है , तथा फलादेश सभी के लिए एक ही ? सम्भव नही,फ़ोन सुन कर तुंरत फलित कर दे ,असंभव ज्योतिष में फलित के लिए ,लग्न ,नवांश ,ग्रह स्पष्ठ ,महा दशा ,अन्तर्दशा ,गोचर की गढ़ना किए बिना फलित करना लोगो को मुर्ख बना है , यह निर्णय दर्शको को करना है , लिखने को बहुत है
किंतु शायद मै भी उन्ही का हिस्सा हूँ

आज पुनः

आज पुनः आप की दी गई शुभ कामनाओ के साथ कुछ लिखने की इच्छा है , मैं तो येः समझ रहा की मेरा ब्लॉग इन्टरनेट का सागर मैं खो जाएगा ,परन्तु आप लोगो ने मुझे फ़िर लिखने के लिए प्ररित किया ,
सर्व प्रथम आप की दी गई शुभ कामनाओ का आभारी हूँ

मुझे तो यह भी नही पता की आप मेरे ब्लॉग तक कैसे पहुचे परन्तु फिर भी कोटिश: धन्यवाद ,

वैस मेरा विषय ज्योतिष है आप को कोई जिज्ञासा हो मुझे लिखे !

Thursday, 18 September 2008

मेरे ब्लॉग का पहला संदेश


इस इन्टरनेट की दुनिया में पहले बार अपना ब्लॉग शुरु कर रहा हूँ वैसे तो मैं एक ज्योतिषी हूँ पर अपनी बात कहने का व आप से विचार बटनें का मध्यम बना रहा हूँ
प्रथम बार समझ में नही आ रहा है की कहाँ से शुरु करू , आज इतना ही फ़िर कभी :)